New Delhi : पूर्वोत्तर भारत की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। Kuki National Organisation (KNO) और United People’s Front (UPF) ने कुकी-जो समुदाय के लिए अलग विधानिक यूनियन टेरिटरी की मांग को दोहराया है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात में समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी तभी मिल सकती है जब उन्हें अलग प्रशासकीय दर्जा दिया जाए।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार और इन संगठनों के बीच लागू “Suspension of Operations (SoO)” समझौता एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। 2008 से लागू इस समझौते का मकसद हिंसा रोकना और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। समझौते के तहत संगठन के कैडर कैंपों में रहेंगे और सरकार उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोककर राजनीतिक समाधान की कोशिश करेगी।
इस नई पहल से मणिपुर और आसपास के इलाकों की राजनीति पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। पहले से ही मैतेई और नागा समुदायों के बीच तनाव मौजूद है और अब कुकी-जो की अलग पहचान की मांग हालात को और जटिल बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को सभी पक्षों को साथ लेकर ही स्थायी समाधान निकालना होगा।








