उत्तराखंड में सरकार जहां पलायन रोकने और युवाओं को गांवों की ओर वापस लाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी इन योजनाओं पर पानी फेरती नजर आ रही है। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल जिले के जयहरीखाल ब्लॉक के ग्राम पाली तल्ली का है, जहां स्वरोजगार के लिए गांव लौटे एक युवक को ढाई साल से पेयजल कनेक्शन तक नहीं मिल सका।

पीड़ित सूर्या बड़थ्वाल, जो पहले दिल्ली में राष्ट्रीय न्यूज चैनलों में कार्यरत थे, राज्य सरकार की होमस्टे योजना से प्रेरित होकर अपने गांव लौटे और पर्यटन विभाग की मदद से होमस्टे शुरू किया। लेकिन बुनियादी जरूरत—पेयजल—के लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
सूर्या का आरोप है कि सितंबर 2023 से अब तक चार बार आवेदन और दो शपथपत्र देने के बावजूद जल निगम कोटद्वार के अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं, शिकायत करने के बाद उन्हें 92,784 रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया। उनका कहना है कि यह बिल बदले की भावना से भेजा गया है, जबकि योजना के तहत कनेक्शन बेहद कम शुल्क में मिलना चाहिए था।

उन्होंने अधिशासी अभियंता और संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और गलत जानकारी देने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि सीएम पोर्टल, सांसद, विधायक और अन्य अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे अधिकारियों की कार्यशैली राज्य और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं—जैसे ‘हर घर नल जल’—को प्रभावित कर रही है। अगर यही स्थिति बनी रही तो पलायन रोकने की कोशिशें भी कमजोर पड़ सकती हैं।

